जल संरक्षण के लिए भिलाई निगम पहली बार कर रहा यह काम: जाने क्या है योजना

जल संरक्षण के लिए भिलाई निगम पहली बार कर रहा यह काम: जाने क्या है योजना

Twin City

भिलाई। जल सरंक्षण की दिशा में नगर निगम द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जल संरक्षण एवं संचयन के लिए तालाबों में वाटर हार्वेस्टिंग अपनाया जा रहा है। इस संबंध में महापौर देवेन्द्र यादव व आयुक्त एसके सुंदरानी ने अधिकारियों को निर्देश दिया था जिसके तहत अब कार्य हा रहा है। पहली बार निगम क्षेत्र में ऐसा हो रहा है कि तालाबों में भी वाटर हार्वेस्टिंग पद्धति को अपनाया जा रहा है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए भिलाई के विभिन्न तालाबों का चयन किया गया है। इसमें रूआबांधा डबरी, गोकुल नगर तालाब, वैकुंठ नगर तालाब, पुरैना तालाब, खमरिया आला बंद तालाब, खमरिया शीतला तालाब, कोहका शीतला तालाब, कुरूद भेलवा तालाब, दर्री छावनी तालाब, बापू नगर कैंप 2 तालाब, नेवई तालाब, रिसाली क्षेत्र शीतला तालाब आदि शामिल हैं। इन तालाबों में वाटर हार्वेस्टिंग विकसित करने के निर्देश आयुक्त महोदय द्वारा दिए गए हैं। जिन तालाबों में पानी की कमी होती है ऐसे तालाबों को विशेषकर चिन्हाकित कर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम डेवलपमेंट करने कहा गया है ताकि तालाबों में पानी भरा रहे एवं आसपास के क्षेत्र के जलस्तर में गिरावट न हो।
महिला समूहों द्वारा किया जा रहा काम
निगम के विभिन्न तालाबों में इसी प्रकार से अन्य क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग के लिए स्व प्रेरणा से प्रति महिला समूह के द्वारा 10-10 पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत स्व. सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कार्य किया जा रहा है, जिसमें जोन 6 में 4 समूह जोन 01 में एक समूह, जोन 2 में एक समूह, जोन 3 में एक समूह एवं जोन 04 में एक समूह द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग की दिशा में कार्य किया जा रहा है! इसके साथ ही निगम क्षेत्र के समस्त उद्यानों, निचले क्षेत्र में, जलजमाव वाले स्थानों में वाटर हार्वेस्टिंग बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा निगम क्षेत्र अंतर्गत आने वाले 27 शासकीय स्कूलों में भी वाटर हार्वेस्टिंग डेवलपमेंट करने के लिए आयुक्त सुंदरानी द्वारा प्रति स्कूल 15000 रुपए विद्यालयों के खातों में स्थानांतरित किए जा चुके हैं।
आवश्यक है वाटर हार्वेस्टिंग
निगम आयुक्त एसके सुंदरानी का कहना है कि वाटर हार्वेस्टिंग बनाने का कार्य निश्चित रूप से वर्षा जल को भूगर्भ मैं पहुंचाने का कार्य करती है। यह आज की तिथि में अत्यंत आवश्यक है, पहले बोर का पानी बहुत ही कम लगभग 60 फीट तक मिल जाता था परंतु अब इससे अधिक फीट में भी पानी प्राप्त नहीं होता है जिससे घटते जलस्तर से इंकार नहीं किया जा सकता। इन सब का एक ही उपाय है जल का संरक्षण एवं संचयन करना जिसे हाइड्रोलॉजिकल फार्मेशन एवं मृदा कण की भौगोलिक स्थिति के अनुसार भूगर्भ में पहुंचाने का कार्य किया जा सकता है तभी वाटर हार्वेस्टिंग का सदुपयोग होगा व जल स्तर बना रहेगा।

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