कलंक का 'जफर बनने के लिए करनी पड़ी कड़ी मेहनत : वरुण

कलंक का ‘जफर बनने के लिए करनी पड़ी कड़ी मेहनत : वरुण

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बॉलीवुड एक्टर वरूण धवन ने अपनी आने वाली फिल्म कलंक को पर्सनल लाइफ को लेकर इंंटरव्यू के दौरान कई खुलासे किए, आइए जानते है उनसे हुई मुलाकात के कुछ अंश.
फिल्म कलंक में खास क्या है जिससे आप उत्साहित हुए?
इस फिल्म में मैंने बहुत अलग काम किया है. इस जोनर में मैंने कभी काम नहीं किया है. थिएटर करते वक़्त मैंने हमेशा ड्रामेटिक अभिनय किये है, जिसे करने का मौका अभी तक मुझे नहीं मिला था. जब मैंने अक्टूबर जैसी फिल्म की थी, तो शुरू में ही पता लग गया था कि ये फिल्म कितनी चलेगी. जितनी भी चली ठीक थी. मैं जब इस तरह की फिल्में करता हूं तो सोचता हूं कि फिल्म में लगाये पैसे का लौस न हो, लेकिन अगर ‘कलंक जैसी फिल्म न चले, तो दु:ख होता है. आर्ट फिल्म से आप सौ करोड़ के बिजनेस की उम्मीद नहीं कर सकते. मुझे एक्टिंग में प्रयोग करते रहना पसंद है.
क्या आपको एक्सपेरिमेंट से डर नहीं लगता ?
हर कोई एक्सपेरिमेंट करता है. अमिताभ बच्चन आज भी एक्सपेरिमेंट करते है. इसके अलावा जो कहानी मुझे आकर्षित करें, उसे ही करना चाहता हूं. फिल्म ‘कलंक में अगर मैं कामयाब हुआ, तो एक अलग जोनर मेरे लिए तैयार हो जायेगा. इसमें डर होता है, पर मुझे अब ये करते रहना चाहिए.
इसमें आपका एक अलग लुक है, जिसके लिए आपने काफी मेहनत भी की है, कैसे किया ये सब?
इस फिल्म के लिए मुझे बहुत काम करना पड़ा. इसके लिए पहले तो मैंने अपने बाल लम्बे किये है. आंखों में सूरमा लगाया है, क्योंकि मैं साल 1940 का एक लोहार हूं और उस समय सूरमा ज्यादा लगाया जाता था. इसमें मुझे बहुत ही एग्रेसिव दिखाया गया है. जिसकी जिंदगी, ‘रूप (आलिया भट्ट) के आने से पहले बहुत ही अलग थी.
इसके अलावा शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियां इसमें बहुत अधिक थी. मुझे बड़े दिखने के साथ-साथ एक मजबूत आदमी के रूप में दिखना था. जो घमंडी भी है. इसमें एक बुल फाइट पर भी सीन है, जिसमें मैंने बॉडी डबल नहीं किया, जिससे मुझे काफी चोटें आई थी. इतना ही नहीं सेट पर जाने के बाद लगता था कि मैं एक अलग दुनिया में आ गया हूं. इसके अलावा डायलौग पर काफी काम करना पड़ा. ये फिल्म मुझे कम्पलीट करती है, जो मुझे किसी फिल्म ने नहीं किया.
इसमें आपने संजय दत्त के साथ काम किया है, कोई पुरानी बचपन की यादें, जिसे आप शेयर करना चाहे?
बचपन के बहुत सारे यादगार पल है. मेरे पिता संजय दत्त की वजह से ही निर्देशक बने थे. उनकी पहली पिक्चर ‘ताकतवर थी, जिसमें संजय दत्त और गोविंदा साथ थे. हमारे साथ उनका एक अच्छा सम्बन्ध है, लेकिन अभिनय करते वक्त वे एक कलाकार के रूप में सामने आये और अच्छा लगा.
वरुण, आपका क्रेज यूथ और बच्चों में बहुत है लेकिन आपकी फिल्में उतनी नहीं आ रही है
ये सही है कि लोग मुझे बच्चों की फिल्म में देखना चाहते है, लेकिन वैसी बहुत अच्छी कोई स्क्रिप्ट नहीं मिली है. अगर मिलेगी तो जरूर करूंगा. आगे मेरी कई फिल्में आ रही है.
इस फिल्म में इटरनल लव दिखाया गया है, लव या रिलेशनशिप आपकी नजर में क्या है?
प्यार एक अच्छा एहसास है, जिसमें आप किसी के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते है. कई बार इंसान बुरा नहीं होता, पर हादसे बुरे हो जाते है, जिससे उसका गलत इस्तेमाल हो जाता है. मैंने रियल लाइफ में ऐसा अनुभव अभी तक नहीं किया है. आजकल लव ऐसा नहीं रहा, पर होना चाहिए.
आगे कौन-कौन सी फिल्में है?
फिल्म ‘कुली नंबर वन का रीमेक अपने पिता के साथ कर रहा हूं. इसके अलावा फिल्म ‘स्ट्रीट डांसर थ्री डी और ‘रणभूमि है.

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