सर्द मौसम में रखेंगे ख्याल, योगासन और प्राणायाम, ये रहे 8 बेहतरीन टिप्स

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सर्दी के मौसम में स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं होना आम बात है। मौसम ठंडा होने के कारण सिरदर्द, कमर दर्द, जुकाम, बदन दर्द, जोड़ों में समस्या, सांस लेने में परेशानी और हार्ट संबंधी व मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। लेकिन इन योग व्यायाम का साथ, आपके स्वास्थ्य पर बेहतर बनाए रखने में सहायक होगा-
शरीर संचालन हेतु पैर की उंगलियां, एड़ी, घुटना, जांघ, पेट, हाथों की उंगलियां, कलाई, कोहनी, कंधा, गर्दन व आंख प्रत्येक अंग का 5 से 10 बार संचालन सुबह-शाम दोनों समय करना फायदेमंद होगा।
सायको सोमेटिक, न्यूरोसोमेटिक, दमा में भी ये यौगिक क्रियाएं लाभदायक हैं। इसके साथ-साथ शशांक आसन, योगमुद्रा, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, स्ट्रेच मकरासन (क्रोकोडायल)-2 लाभदायक हैं।
कुछ शारीरिक व मानसिक रोग तनाव व चिंता से भी होते हैं। इन्हें दूर करने के लिए यौगिक क्रियाएं उत्तम हैं। प्राणायाम और मेडिटेशन करना मानसिक समस्याओं में बेहद फायदेमंद है।
स्वस्थ लोगों के लिए भी यौगिक क्रियाएं लाभदायक हैं। स्वस्थ लोग स्वस्थ रहें, इसलिए योग विशेषज्ञ की सलाह से ये आसन करें – ताड़ासन, त्रिकोणासन, कमर को खड़े होकर आगे-पीछे व दाएं-बाएं झुकाने की क्रियाएं 5 बार करें।
सीधा लेटकर अर्द्धहलासन, साइकलिंग, पवनमुक्तासन, सीधा नौकासन। बैठकर पश्चिमोत्तासन, शशांक आसन व योगमुद्रा करना चाहिए। उल्टा लेटकर भुजंगासन, सर्पासन, शलभासन, धनुरासन, नौकासन, रोलिंग नौकासन करना चाहिए।
प्राणायाम सभी के लिए लाभदायक है। इसमें योगेन्द्र प्राणायाम, नाड़ीशोधन प्राणायाम, भ्रमिका प्राणायाम, उज्जयी प्राणायाम अधिक लाभदायक रहते हैं। ध्यान अपनी शक्ति के अनुसार कर सकते हैं। लंबी गहरी सांस लें व छोड़ें। ओम का उच्चारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
ध्यान, प्राणायाम, शवासन, योगनिद्रा के द्वारा सुषुप्त शक्तियों को जाग्रत कर सकते हैं। इससे काम करने की शक्ति बढ़ सकती है, मन एकाग्र होता है, बुद्धि तीक्ष्ण होती है। इन क्रियाओं से शारीरिक व मानसिक रोगों से लडऩे की प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ जाती है।
ठंड के दिनों में, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग के रोगियों को रात में अधिक कष्ट होता है। उनके लिए भी डॉक्टर की सलाह व योग विशेषज्ञ की सलाह से लाभ होता है। प्रत्येक व्यक्ति को प्रात:- शाम घूमना चाहिए। दिन में एक बार दिल खोलकर हंसना चाहिए। सोने के 2 घंटे पूर्व सुपाच्य भोजन करना चाहिए।

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