तो इस बार कांग्रेस फतह करेगी दुर्ग निगम, गुटबाजी ढहाएगी भाजपा का किला !

तो इस बार कांग्रेस फतह करेगी दुर्ग निगम, गुटबाजी ढहाएगी भाजपा का किला !

Durg

दुर्ग। नगर निगम चुनाव अब रोमांचक मोड़ पर आ गया है। जहां कांग्रेस इस बार अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा अब भी अंदरूनी गुटबाजी और बागियों के चलते परेशान नजर आ रही है। इन सबके बावजूद अगर जनता के नजरिये की बात करें तो इस बार लोग भी कांग्रेस के पक्ष में झुकते नजर आ रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही जनता के हित में लिये गये ताबड़तोड़ फैसलों ने लोगों को इस बार भाजपा का किला ढहाने के लिए मजबूर कर दिया है। वहीं कांग्रेस नेताओं की सक्रियता और एकजुटता इस बार निगम फतह करती नजर आ रही है।

दुर्ग निगम चुनाव में इस बार भाजपा 20 साल की सत्ता गंवाती दिख रही है। गुटबाजी और संगठन की निष्क्रियता इस बार भाजपा पर भारी पड़ रही है। जिसका पूरा लाभ कांग्रेस को मिलता दिख रहा है। भाजपा में टिकट वितरण से पहले से चली आ रही गुटबाजी अब धरातल पर नजर आने लगी है। वहीं टिकट न मिलने की वजह से चुनावी मैदान में उतरे बागी खुद अधिकृत भाजपा प्रत्याशी के लिए बड़ी मुसीबत बनकर सामने खड़े हुए हैं। इसके विपरीत कांग्रेस ने टिकट वितरण के पहले और बाद में लगातार सक्रियता दिखाते हुए जहां बागियों को मनाने में शत- प्रतिशत कामयाब रही। वहीं दूसरी तरफ सरकार के एक साल के कामकाजों को भी जनता तक सीधा पहुंचाने और उन्हें अपने पक्ष में खींचने में भी पूरी तरह सफल नजर आ रही है। इस बार जनता का समर्थन भी कांग्रेस में पक्ष में दिख रहा है। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा की करारी हार निकाय चुनाव में भी जारी रहेगी। भाजपा की राष्ट्रीय पदाधिकारी के समर्थकों को लेकर शहर में बहुत नाराजगी है जिसका खामियाजा भाजपा को हार के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

इन वजहों से कांग्रेस को लेकर आश्वस्त
15 साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में आई। जिसके बाद जनता के हित में लिये गये फैसलों ने कांग्रेस की ओर लोगों के विश्वास को खींचा है। शहर विधायक की सक्रियता सहित निगम में पिछले एक साल में हुए विकास कार्यों से जनता संतुष्ट नजर आ रही है। वहीं भाजपा की अंदरूनी कलह धरातल पर उतरती नजर आई जिसका बहुत ही नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।

इसलिए ढह सकता है भाजपा का किला
पिछले 20 सालों से निगम की सत्ता में काबिज भाजपा में इस बार कुछ भी सही नहीं चल रहा है। विधानसभा चुनाव की करारी हार के बावजूद अब भी संगठन गुटबाजी की भेंट चढ़ा हुआ है। स्थानीय सांसद और बड़े नेताओं सहित कर्मठ कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल राष्ट्रीय महामंत्री की पसंद को दी गई तवज्जो कई वार्डों में संगठन को भारी पड़ रही है।

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