गेड़ी बॉल में प्रतिभा दिखाएंगे गांव के बच्चे, 4 दिसंबर को दुर्ग के इस कॉलेज में होगी प्रतियोगिता

गेड़ी बॉल में प्रतिभा दिखाएंगे गांव के बच्चे, 4 दिसंबर को दुर्ग के इस कॉलेज में होगी प्रतियोगिता

Twin City

भिलाई। विविधता भरे छत्तीसगढ़ के खेल व संस्कृति को पहचान दिलाने प्रदेश सरकार कई प्रयास कर रही है। पारंपरिक खेलों को लेकर छत्तीसगढ़ की पहचान पूरे देश में है लेकिन इन खेलों को आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं हो रहा है। पारंपरिक खेलों की रूपरेखा में थोड़ा बदलाव कर इसे और रोचक बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मास्टर्स गेम्स एसोसिएशन के महासचिव ताजुद्दीन ने गेड़ी और फुटबॉल को मिलाकर गेड़ीबॉल का प्रारूप तैयार किया है। इस खेल की प्रारंभिक प्रतियोगिता बोरई में हो चुकी है। अब इस खेल की आगामी प्रतियोगिता दुर्ग के सुराना कॉलेज में 4 दिसंबर को होने जा रही है।

आगामी 4 दिसंबर को सुराना कॉलेज परिसर में होने वाले गेड़ीबॉल प्रतियोगिता को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके तहत खपरी सिलोदा व बोरई की टीमों की बीच मुकाबला खेला जाएगा। इस प्रतियोगिता के संबंध में छत्तीसगढ़ मास्टर्स गेम्स एसोसिएशन के महासचिव ताजुद्दीन ने बताया कि पिछले दिनों आयोगिज प्रतियोगिता में बोरई व खपरी सिलोदा की टीमें क्रमश: प्रथम व द्वितीय स्थान पर रही हैं। सुराना कॉलेज में इन्हीं दोनों टीमों के बीच मुकाबला होगा। प्रतियोगिता के लिए दुर्ग संभाग कमिश्रर, कलेक्टर, भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है।

ऐसे खेला जाता है गेड़ीबॉल

गेड़ीबॉल खेल का प्रारूप अभी छत्तीसगढ़ के लिए नया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुसार इस खेल का प्रारूप तैयार किया गया है। इस खेल को भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा भी प्रमोट किया जा रहा है। इस खेल में छत्तीसगढ़ का प्रारंभिक गेड़ी दौड़ की झलक मिलेगी। फुटबॉल की तरह इस खेल में खिलाड़ी गेड़ी चढ़कर बॉल को गोल प्वाइंट की ओर मारेंगे। इस खेल के लिए 10-10 मिनट का बे्रक तय किया गया है ताकि खिलाड़ी ज्यादा न थके।

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