मुंह की गंदगी बना सकती है दिल को बीमार

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सड़े हुए दांत, फूले हुए मसूड़े और मुंह से आती दुर्गंध, दिल को बीमार बना सकती है। मुंह की खराब सेहत हृदय और धमनियों के बढ़ते खतरे का भी संकेत है। मुंह की गंदगी हाई बीपी का खतरा बढ़ा देती है, जिससे हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा और बढ़ जाता है।
मुंह साफ नहीं रखने से जमा होने वाले प्लाक के कारण मसूड़ों के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। जिन्हें मसूड़ों से संबंधित गंभीर समस्याएं जैसे जिंजिवाइटिस या गंभीर पीरियोडोंटल डिजीज हैं, उन्हें हृदय रोगों का खतरा सबसे अधिक होता है, विशेष रूप से तब जब समय रहते इनका पता न चले और उपचार न कराया जाए। इसके अलावा जिन्हें दांतों और मसूड़ों से संबंधित निम्नलिखित समस्याएं हैं, उनमें भी खतरा बढ़ जाता है: मसूड़े लाल व सूजे हुए होना और उन्हें छूने में दर्द होना। खाने, ब्रश करने या फ्लॉस करने पर मसूड़ों से खून आना। Óमसूड़ों और दांतों के आसपास पस पड़ जाना या दूसरे प्रकार के संक्रमण होना। मुंह से बदबू आना या मुंह का स्वाद खराब होना। दांत ढीले हो जाना।
दो बार ब्रश करें: सुबह और रात को दो बार ब्रश करें। इसके अलावा कुछ भी खाने-पीने के बाद साफ पानी से कुल्ला करें। टूथपिक का प्रयोग न करें, अगर दांतों में खाना फंस जाए तो उसे टूथपिक से न निकालें। इससे मसूड़ों को नुकसान होता है। इस समस्या को नजरअंदाज भी न करें। डॉक्टर को दिखाएं। तीन महीने में बदलें ब्रश, ज्यादा पुराना ब्रश मसूड़ों और दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए हर तीन महीने में ब्रश बदल लें।
साल में एक बार दांतों का चेकअप कराएं, दांतों में तकलीफ न हो तब भी साल में एक बार दांतों का चेकअप जरूर कराएं। कभी-कभी बाहर से देखने पर दांत सामान्य लगते हैं, पर कई बार अंदर ही अंदर उनमें कोई बीमारी पल रही होती है। शुरू में इसका पता नहीं चलता, लेकिन समय के साथ यह समस्या गंभीर होती जाती है। दांतों की जांच इस तरह की समस्याओं से बचाती है।
जिन लोगों को दांतों और मसूड़ों से संबंधित समस्याएं होती हैं, उनके हृदय रोगों की चपेट में आने का खतरा उन लोगों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है जिन्हें इनसे संबंधित कोई समस्या नहीं होती। अध्ययन बताते हैं कि मुंह की गंदगी से हृदय रोगों का खतरा तीन गुना हो जाता है। जो लोग नियमित रूप से अपने मुंह की सफाई नहीं करते उन लोगों को हृदय रोगों का खतरा उनसे भी अधिक होता है, जिनके खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर ज्यादा होता है। जिन्हें पहले से ही हृदय से जुड़ी समस्याएं, जैसे बैक्टीरियल एंडोकार्डिटिस (हृदय की अंदरूनी परत का संक्रमण) का खतरा अधिक है, उन्हें मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उपचार के दौरान भी सावधानियां रखनी चाहिए। हार्ट अटैक के बाद डेंटल सर्जरी या गहन ओरल ट्रीटमेंट के लिए कम से कम छह महीने इंतजार करना चाहिए। अगर आप एंटीकोएगुलैंट (रक्त को पतला करने वाली दवाएं) ले रहे हैं तो डॉक्टर को बताएं, क्योंकि इन दवाओं के कारण सर्जरी आदि के हालात में खास एहतियात रखने की जरूरत होती है।

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